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जनभागीदारी से बदली तस्वीर, तीन गांवों में निर्माण कार्य, बिना कमीशन खर्च हुई पूरी राशि-“मदन तिरोले”

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जनभागीदारी से बदली तस्वीर, तीन गांवों में निर्माण कार्य, बिना कमीशन खर्च हुई पूरी राशि-“मदन तिरोले”

खण्डवा/ जनपद पंचायत खंडवा के अंतर्गत भामगढ़, भा,वसिंगपुरा एवं ब्रह्मगीर महाराज गुरुगादी आश्रम क्षेत्र में जनभागीदारी और 15वें वित्त आयोग की राशि से विभिन्न निर्माण कार्य पूरे किए गए हैं।
पूर्व जनपद सदस्य एवं वर्तमान उपाध्यक्ष जनपद पंचायत खंडवा मदन तिरोले ने बताया कि सभी कार्य पारदर्शिता के साथ कराए गए हैं तथा किसी प्रकार की कमीशनखोरी या रिश्वत नहीं दी गई। ब्रह्मगीर महाराज गुरुगादी आश्रम में भागवत कथा पांडाल व सत्संग भवन का निर्माण 9.50 लाख रुपए की लागत से जनसहयोग के माध्यम से कराया गया। वहीं भामगढ़ शिव मंदिर, सिंगाजी मंदिर और साईं मंदिर परिसर में 1 लाख 58 हजार रुपए की लागत से पेवर ब्लॉक लगाए गए, जिसकी राशि 15वें वित्त आयोग से स्वीकृत हुई। इसके अलावा शीतला माता मंदिर, भावसिंगपुरा में 3 लाख रुपए की लागत से विकास कार्य 15वें वित्त आयोग एवं जनसहयोग से कराए गए। तिरोले ने कहा कि यह सभी कार्य निस्वार्थ भाव से और पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि पूर्व कार्यकाल वर्ष 2001 में भी जनभागीदारी से सराई और भामगढ़ में बड़े स्टॉप डेम बनाए गए थे, जो आज भी जल संरक्षण और संवर्धन के जीवंत उदाहरण हैं। इन डेमों से लगभग 10 गांवों में सिंचाई सुविधा बढ़ी, जिससे कृषि उत्पादन का रकबा बढ़ा है,अनाज के उत्पादन में कई गुना वृद्धि हुई। उन्होंने बताया की सन 2000 से पहले क्षेत्र में सूखे की स्थिति रहती थी और किसान सोसायटी का कर्जा तक नहीं चुका पाते थे। लेकिन आज किसान आर्थिक रूप से सशक्त हैं, उनके पास जमीन, मकान, गोदाम, दोपहिया चार पहिया वाहन हैं और उनके बच्चे इंदौर, भोपाल, पुणे जैसे शहरों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर अच्छी नौकरियों में कार्यरत हैं। वर्तमान व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए तिरोले ने कहा कि आज के समय मे बिना लेनदेन के कोई काम नही होते है इस कारण निर्माण कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जिससे पुल-पुलिया और डेम पहली ही बारिश या बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति शासन की योजनाओं में जनभागीदारी और ईमानदारी से कार्य करे तो भारत फिर से सोने की चिड़िया बन सकता है। ईमानदारी और वफादारी का सौदा भले महंगा हो, लेकिन उसका परिणाम स्थायी और जनहितकारी होता है।

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